Saturday, May 7, 2016

दोस्त

लगता है कल ही साथ आये थे 
ऐसे हाथ पकड़ कर 
कुछ लम्हें थे जो बिता दिए
कुछ किस्से थे जो सुना दिए
पता नहीं वापस कब ये लौटकर आयेंगे

हँसा भी तुम्हारे साथ 
रोया भी तुम्हारे साथ 
उठा भी तुम्हारे साथ 
सोया भी तुम्हारे साथ

थोड़ा तो धीरे चलो यारो 
रास्ता गुजरने वाला है 
मंजिल तो दिखने लग गयी
पर सफ़र अभी बाकी है

आओ जी ले इन छोटे छोटे 
पलों में अपनी जिन्दगी 
क्योंकि पता नहीं कब ये 
लम्हें अब गुजर जायेंगे 
फिर वापस लौट कर ना आयेंगे 

कुछ का सफ़र खत्म हुआ 
और 
कुछ का है अभी शुरू हुआ 
दूर कुछ चले जायंगे 
फिर पता नहीं पास कब आयेंगे
याद करेंगे या नहीं 
पर वादा करता हु यारों
तुम हमारे बिना जी नहीं पाओगे 

जो आ रहे है हमारे रास्तो पर 
उनके लिए एक बात कहता हूं 
जी लेना यहां जिन्दगी 
फिर जी नहीं पाओगे 
पार्टी अभी कर लेना 
बाद में बैंक में ही जमा करवाओगे 

अलविदा कहता हु यारों
अब समय हो गया है 
नया सफ़र कह रहा है की नयी शुरुवात है 
पर मुझे पता नहीं शुरुवात  है या अंत...

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